

🔶 “साइबर जागृति अभियान” के तहत आज जिले में करीब 67 जगहों पर कार्यक्रम आयोजित कर, 6097 लोगों को जागरूक किया गया।

🔶 जिले में लगातार जारी है साइबर जागरूकता अभियान।

🔶 तुरंत लोन देने वाले फर्जी ऐप्स डाउनलोड न करने की अपील।

🔶 सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लुभावने ऑफ़र से रहें सावधान।


🔶 साइबर ठगी होने पर तत्काल राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर अपनी रिपोर्ट दर्ज कराएं।
छत्तीसगढ़ पुलिस के निर्देशों के तहत चल रहे ‘साइबर जागृति अभियान’ के चौथे हफ्ते में आज एक व्यापक जन-अभियान चलाया गया। आगामी 02 अक्टूबर तक चलने वाले इस अभियान का इस हफ्ते का मुख्य विषय “स्मार्टफोन की प्राइवेसी और सुरक्षित इंटरनेट” है। इसी को ध्यान में रखते हुए आज जिले के सभी थानों, चौकियों, गांवों, स्कूलों और कॉलेजों को मिलाकर करीब 67 जगहों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें 6097 आम लोगों को डिजिटल सुरक्षा को लेकर जागरूक किया गया।
इस दौरान पुलिस की टीमों ने बताया कि आज के डिजिटल समय में ठग लोगों को ठगने के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। इन खतरों से बचने के लिए कुछ जरूरी बातें बताई गईं:
लोन ऐप्स और बिजली बिल अपडेट के नाम पर ठगी
तुरंत लोन देने का दावा करने वाले फर्जी मोबाइल ऐप्स से हमेशा बचें, क्योंकि ये ऐप बिना अनुमति के फोन का सारा डेटा चुरा लेते हैं और बाद में ब्लैकमेल करते हैं। इसके अलावा, बिजली का बिल न चुकाने पर कनेक्शन काटने या तुरंत अपडेट करने का मैसेज भेजने वाले साइबर ठगों से भी सतर्क रहें। बिजली विभाग कभी भी इस तरह के नंबरों से व्यक्तिगत (पर्सनल) मैसेज नहीं भेजता है।
सरकारी नौकरी के नाम पर फर्जीवाड़ा
घर बैठे ऑनलाइन पार्ट-टाइम नौकरी करके हजारों रुपये कमाने जैसे लुभावने ऑफर्स से सावधान रहें। साथ ही, सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर हो रही ठगी से भी पूरी तरह सतर्क रहें।
पार्सल के नाम पर ठगी से सावधान
यदि आपको फोन पर यह डराया जाए कि आपके नाम से कोई पार्सल आया है, जिसमें ड्रग्स या अवैध सामान निकला है और कस्टम अधिकारियों ने उसे पकड़ लिया है, तो घबराएं नहीं। इस तरह के कॉल पूरी तरह फर्जी होते हैं और पार्सल के नाम पर कभी भी थाने या जांच एजेंसी ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहती है।
एआई और डीपफेक का जाल
ठग अब ऐसी तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे वे आपके किसी अपने की आवाज या वीडियो बिल्कुल वैसा ही बना लेते हैं और पैसों की मांग करते हैं। ऐसे फोन आने पर तुरंत भरोसा करके पैसे न भेजें, बल्कि पहले उस इंसान से खुद बात करके सच्चाई का पता लगाएं।
इसके साथ ही यह भी समझाया गया कि अपना कोई भी ओटीपी, यूपीआई पिन, पासवर्ड या बैंक की जानकारी किसी को न बताएं और किसी भी अनजान या लुभावने लिंक पर क्लिक न करें। यदि कोई गलती से इस तरह के साइबर फ्रॉड का शिकार हो जाता है, तो तुरंत नेशनल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर फोन करें और अपने पास के थाने में इसकी जानकारी दें।
समय पर सूचना मिलने से ठगी गई रकम को बैंक से ही रोकने में आसानी होती है।
